मंगलवार, 29 जून 2010
भोपाल
आज भोपाल शहर के बारे में बताती हूँ। भोपाल दिल्ली के मुकाबले छोटा शहर है। पहले ही साफ़ कर दूँ की मैं भोपाल की तुलना दिल्ली से बिल्कुल भी नहीं कर रही हूँ । बस एक रेखाचित्र दिमाग में बन जाये इसलिए यहाँ दिल्ली का नाम लिया है।
बुधवार, 2 जून 2010
bhopal
भोपाल में रहना बड़ा मुश्किल होता जा रहा है। एक घर नहीं मिल रहा है। काम की समस्या नहीं है पर एक घर तो मिल जाये रहेने के लिए। परेशानिया तो बहुत है पर मैं इतनी कमजोर नहीं हूँ की मैदान छोड़ कर भाग जाऊ । परेशानिया है तो इनका हल भी जरुर होगा। अब वह हल ही खोजना है।
गुरुवार, 18 मार्च 2010
बवाल की बजाय दोस्ती
भारत में हर बात पर बवाल होता है । महिला आरक्षण बिल, मंहगाई, बजट, क्रिकेट, पडोसी से बातचीत पर लड़ाई। थोड़ा सा प्यार और दोस्ती भरा व्यवहार क्यों नहीं अपनाते हम।
गुरुवार, 4 मार्च 2010
आम आदमी की भावनाएँ
इंसान में भावनाएं होना बहुत जरूरी है। लेकिन हम हिंदुस्तानी लोग कुछ ज्यादा ही भावुक होते हैं इसलिए बात-बात पर हमारी भावनाएं भड़क जाती हैं। अब एम एफ हुसैन की विवादास्पद पेंटिंग को ही लीजिए। लोगों की भावनाएं इतनी ज्यादा भड़की कि हुसैन को भारत छोड़कर दुबई जाना पड़ा। आखिर हुसैन ने ऐसा क्या गुनाह किया कि कुछ कट्टरपंथी लोग उनकी जान के दुश्मन बन गए। अब खबर है कि उन्होनें कतर की नागरिकता स्वीकार कर ली है। हुसैन ने अपनी पेंटिंग बनाते हुए जो किया था वह एक पेंटर की अभिव्यक्ति थी। उससे हम सहमत और असहमत दोनों हो सकते है। अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार हर व्यक्ति के पास है। लेकिन विरोध करने का भी एक तरीका होता है। और फिर जो पेंटिंग वर्ष 1970 में बनी थी उस पर तब किसी ने विरोध दर्ज क्यों नहीं किया। 25 साल बाद ही कुछ लोगों को क्यों इसकी याद आई? देश में मंहगाई बढ़ती जा रही है, बेरोजगारी ,खासकर शिक्षित बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, आए दिन भष्ट्राचार के मामले सामने आ रहे है, कृषि की उत्पादकता घटती जा रही है। कुछ करना ही है तो इन क्षेत्रों में किया जाना चाहिए। नेता सिर्फ राजनैतिक रोटियां सेंकने और चर्चा में रहने के लिए ही आम आदमी की भावनाओं की आड़ लेते हैं। करने को तो बहुत कुछ है शायद हम उस और देखना ही नहीं चाहते।
गुरुवार, 3 सितंबर 2009
ब्लॉग बनाते हुए
ब्लॉग बनाते हुए टाइटल क्या होना चाहिए ये सोचने में सबसे ज़्यादा टाइम लगा अरे नाम में क्या रखा है.
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